बुंदेलखंड में मजदूर संकट में, दुकानों पर लगे पोस्टर, उधार बंद है

कोरोना के खौफ के चलते शहरों से गांव लौटे मजदूरों के सामने अब बड़ा संकट है। दस दिन का वक्त तो गांव में गेहूं कटाई से मिली मजदूरी से कट गया, लेकिन आगे क्या होगा। बुंदेलखंड में रहने वाले मजदूर परिवारों के सामने यह सबसे बड़ी चिंता है। 


यूपी के जिलों से ज्यादा खराब हालात मध्यप्रदेश के गांवों में हैं। क्योंकि इन गांवों में बड़ी संख्या में मजदूर शहरों से वापस लौटे हैं। इस बार मजदूरों की संख्या बढ़ने से मजदूरी के रेट भी घट गए। वहीं लॉकडाउन में दुकानदारों ने भी उधार देना बंद कर दिया है। दुकानों पर पोस्टर लगा दिए हैं कि उधार बंद है।

बुंदेलखंड में यूपी के झांसी, ललितपुर, बांदा, महोबा, जालौन, हमीरपुर, चित्रकूट और मध्यप्रदेश के दतिया, निवाड़ी, सागर, दमोह, पन्ना, टीकमगढ़, छतरपुर और शिवपुरी शामिल हैं। प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक इन सब जिलों के पंजीकृत मजदूरों की संख्या 8 लाख है। 

बुधवार को अमर उजाला ने झांसी के समीपवर्ती जिलों के गांवों में जाकर मजदूरों की स्थिति को देखा। सबसे पहले हाईवे किनारे पड़ने वाले झांसी के बड़ौरा में गेहूं की कटाई कर रहे मजदूरों से मुलाकात की। शोबरन के खेत में गेहूं की कटाई कर रहे मजदूरों का कहना था कि फिलहाल तो काम चल रहा है।